
ग्रीष्मकालीन मूंग फसल में ग्लाइफोसेट और पैराक्वाट जैसे खतरनाक खरपतवारनाशी का छिड़काव न करें
खण्डवा 11 मार्च, 2025 – मूंग एक ऐसी दलहनी फसल है, जिसे अधिकतर डॉक्टर मरीजों को बीमारी के समय खाने की सलाह देते हैं, प्रदेश एवं जिले में खरीफ एवं ग्रीष्म मौसम में मूंग की फसल पैदा की जाती है। उपसंचालक कृषि श्री के.सी. वास्कले ने बताया कि हानिकारक रसायनों जैसे खरपतवारनाशक एवं दवाइयों के अधिक उपयोग से मूंग की दाल खाने योग्य नहीं रहती है। शासन एवं जिला प्रशासन ने इसी की चिंता जताते हुए जिले के सभी किसानों भाईयो से अपील की है कि ग्रीष्मकालीन मूंग फसल पर पैराक्वाट एवं ग्लाइफोसेट (सफाया) का उपयोग न करें तथा कम से कम पेस्टीसाइड्स का छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि साधारण तौर पर इसका उपयोग सकरी एव चौड़ी पत्तियों वाले पौधों को मारने के लिए किया जाता है। यह देखा गया है कि जिले के ज्यादातर कृषक ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को जल्द सुखाया जा सके इसके लिए पैराक्वाट एवं ग्लाइफोसेट का अंधाधुंध उपयोग करते हैं।
उपसंचालक कृषि श्री वास्कले ने बताया कि यह मानव ही नहीं बल्कि अन्य जीवों जैसे पशु पक्षियों, मछलियों आदि के तंत्रिका तंत्र की संरचना और उनकी कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। ग्लाइफोसेट पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक अमीनो एसिड के उत्पादन को अवरूद्ध करके उन्हें नष्ट कर देता है। उन्होंने बताया कि ग्लाइफोसेट मिट्टी और पानी में मौजूद रह सकता है और यह कृषि के लिए लाभदायक कुछ सूक्ष्मजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके उपयोग से पाचन, श्वसन, तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके साथ ही यह आंखों के लिए नुकसानदायक है। इसके संपर्क में आने से आंख, त्वचा, नाक एवं गले में जलन और अस्थमा हो सकता है। यदि इसे निगल लिया जाए तो गले में जलन, दस्त एवं मितली हो सकते हैं।
उपसंचालक कृषि श्री वास्कले ने बताया कि वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार फसल में अनुशंसित मात्रा में रसायनों का छिड़काव करें एवं रसायनों का अंधाधुंध उपयोग करने से बचें। बहुत आवश्यक हो तभी छिड़काव करें। एक ही कीटनाशक में अनेक न मिलाएं। आवश्यकता होने पर पहले से मिश्रित रसायनों का उपयोग करें। आज जिस तरह से मानवता असाध्य रोगों से पीड़ित हो रही है वह हमारे लिए चिंता का विषय है। इसलिए सभी किसानों भाइयो से आग्रह है कि वे अपनी फसल की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए प्राकृतिक, जैविक और कम हानिकारक रसायनों को प्राथमिकता देवें। उन्होंने बताया कि मूंग की फसल में प्रमुख कीटों, जैसे – चने की इल्ली, जैसिड, सफेद मक्खी, फली बेधक, और रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित करने के लिए जैविक कीटनाशकों जैसे नीम तेल, नीम की खली, धतूरा और आक का अर्क, छाछ आदि का छिड़काव कर सकते हैं। किसानों को जैविक खेती अपनाकर रसायनों पर निर्भरता कम करनी चाहिए, जिससे सतत कृषि और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सके।













